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20 साल में निर्विरोध चुनीं 735 पंचायतें, हर साल बढ़ रहा सहमति से ग्रामीण संसद चुनने का आंकड़ा*
हिमाचल में अब पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की पूरी बिसात बिछ चुकी है। ऐसे में राज्य के कुछ क्षेत्रों में आपसी भाईचारे के साथ पंचायतों को निर्विरोध चुनने की मुहिम भी जारी है। इस मुहिम में कितनी पंचायतें सफल होंगी, यह तस्वीर 15 मई तक साफ होगी। वर्ष 2000 से लेकर 2020 तक हुए चुनाव में राज्य में 735 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं। राज्य में अब तक निर्विरोध चुनी गई पंचायतों को सरकार की ओर से 638.70 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। अब राज्य में होने वाले वर्ष 2026 के पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में राज्य की कितनी निर्विरोध पंचायतें चुनी जाएंगी, यह तस्वीर मई में साफ होगी।
पंचायतीराज संस्थाओं के पिछले पांच चुनावों वर्ष 2000 से लेकर 2020 तक के नतीजों पर नजर डालें, तो तस्वीर चौंकाने वाली है। इस पूरे दौर में प्रदेश में एक भी पंचायत समिति और जिला परिषद निर्विरोध नहीं चुनी गई। यानी गांव स्तर से ऊपर की राजनीति में सहमति की राह अब तक बंद ही रही। दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के स्तर पर लोगों ने कई बार आपसी सहमति की मिसाल पेश की है। इस दौरान प्रदेश में कुल 735 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं और सरकारी प्रोत्साहन का पूरा लाभ भी उठाया। यह आंकड़ा बताता है कि जमीनी स्तर पर भाईचारा और सामाजिक समझदारी की परंपरा अभी भी जीवित है।
इस बार मिलेंगे 25 लाख
पंचायतीराज विभाग ने पंचायत से लेकर जिला परिषद तक निर्विरोध चुनाव पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में कई गुना बढ़ोतरी कर दी है।


