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अंधेरे में भी रोशनी: 79 साल के प्रोफेसर ने गरीबी और अंधत्व के बावजूद ज्ञान की लौ जलाई
भारत

अंधेरे में भी रोशनी: 79 साल के प्रोफेसर ने गरीबी और अंधत्व के बावजूद ज्ञान की लौ जलाई

ब्यूरो रिपोर्ट | अपडेटेड: 05 May, 2026
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    अंधेरे में भी रोशनी: 79 साल के प्रोफेसर ने गरीबी और अंधत्व के बावजूद ज्ञान की लौ जलाई 


    क्या ज्ञान कभी हार सकता है—अंधेपन, गरीबी और दर्द के सामने?


    डॉ. संतोष गोयल, 79 वर्षीय विद्वान, आज पूरे भारत का दिल जीत रहे हैं अपनी अद्भुत कहानी से। 1971 में इंग्लिश में PhD हासिल करने वाले डॉ. गोयल ने Army Education Corps में सेवा दी और पुणे के National Defence Academy में पढ़ाया।


    लेकिन जिंदगी ने करवट ली—एक गंभीर आंखों की बीमारी ने उनकी रोशनी छीन ली। मेडिकल डिस्चार्ज के चलते पूरी पेंशन भी नहीं मिल सकी।

    फिर भी… उन्होंने हार नहीं मानी।


    आज वे आगरा के एक मंदिर में रहते हैं और बच्चों को फ्री में इंग्लिश साहित्य और ग्रामर पढ़ाते हैं।

    गरीबी के बावजूद, वे William Shakespeare, John Milton और John Keats की रचनाएं बिना देखे सुनाते हैं—और हर किसी को प्रेरित करते हैं।


    2–4 मई 2026 के बीच उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे साधारण कपड़ों में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते नजर आए। इस वीडियो ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया।


    अब भारतीय सेना के अधिकारी और NDA के पूर्व छात्र उनकी मदद के लिए आगे आए हैं—इलाज और बेहतर जीवन के लिए।


    👉 उनकी कहानी बताती है—सच्चा शिक्षक कभी रुकता नहीं, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।


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