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अपने ही घर आने पर टोल क्यों?” – हिमाचल के लोगों ने उठाई बड़ी मांग
कुनिहार से Nation News के लिए हरजिन्दर ठाकुर की रिपोर्ट:
हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वारों पर लगने वाले टोल टैक्स को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई ऐसे निवासी हैं जिनकी गाड़ियाँ चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड हैं।
दरअसल, हिमाचल के काफी लोग बाहरी राज्यों में सरकारी, अर्द्ध-सरकारी विभागों, कंपनियों या छोटे-मोटे कारोबार से जुड़े हुए हैं। कोरोना काल के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग अपना काम बंद करके परिवार सहित वापस हिमाचल लौट आए थे। कुछ लोग बाद में फिर बाहर चले गए, जबकि कई लोगों ने प्रदेश में ही नया काम शुरू कर दिया। वहीं कई लोग नौकरी से सेवानिवृत्त होकर स्थायी रूप से अपने घर हिमाचल में बस गए हैं।
समस्या तब सामने आती है जब ये लोग किसी काम से बाहर जाते हैं—जैसे अपने बच्चों से मिलने, पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में—और फिर वापस अपने घर हिमाचल लौटते हैं। प्रदेश में प्रवेश करते समय उन्हें टोल टैक्स देना पड़ता है, जिसे लोग अनुचित मान रहे हैं।
हिन्दुस्तान जन सेवा समिति के अध्यक्ष आर.पी. जोशी ने इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि हिमाचल के स्थायी निवासियों से अपने ही घर में प्रवेश करते समय टोल लेना उचित नहीं है।
उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि ऐसे लोगों को राहत देने के लिए नजदीकी तहसील या उप-तहसील से प्रमाण पत्र या विशेष स्टिकर जारी किया जाए। इस स्टिकर को वाहन पर लगाने से स्थानीय लोगों को हिमाचल में प्रवेश के समय टोल से छूट मिल सकेगी।
उनका कहना है कि इस व्यवस्था से हिमाचल के निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें अपने ही प्रदेश में आने के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
👉 मांग साफ है: “हिमाचल के लोगों को अपने घर लौटने पर टोल से राहत मिलनी चाहिए।”


