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दान प्राप्त कॉलेज में कथित नियुक्ति से सरकार को 60 लाख से अधिक का नुकसान
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दान प्राप्त कॉलेज में कथित नियुक्ति से सरकार को 60 लाख से अधिक का नुकसान

ब्यूरो रिपोर्ट | अपडेटेड: 13 Mar, 2026
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    दान प्राप्त कॉलेज में कथित नियुक्ति से सरकार को 60 लाख से अधिक का नुकसान


    नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर उठे गंभीर सवाल


    चंडीगढ़, 12 मार्च : यूटी चंडीगढ़ प्रशासन की 95% सरकारी अनुदान योजना के अंतर्गत की गई एक नियुक्ति के सामने आने के बाद सरकारी राजकोष को हुए भारी वित्तीय नुकसान तथा नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।


     *यह मामला वर्ष 2017 में डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10, चंडीगढ़ में इतिहास विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर की गई नियुक्ति से जुड़ा है।* आरोप है कि नियुक्त व्यक्ति सुरज नारायण इतिहास (UGC Subject Code-6) में स्नातकोत्तर नहीं थे, जबकि यूजीसी नियमों के अनुसार इतिहास विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए संबंधित विषय में स्नातकोत्तर डिग्री अनिवार्य है। इस आधार पर उन्हें यूजीसी मानदंडों के अनुसार इतिहास पढ़ाने के लिए अयोग्य बताया गया है।


    चूंकि यह नियुक्ति 95% सरकारी अनुदान योजना के अंतर्गत हुई थी, इसलिए चंडीगढ़ के आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. राजेन्द्र सिंगला ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 से अब तक लगभग ₹60–65 लाख का सरकारी नुकसान हो चुका है। इस संबंध में उन्होंने यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक, शिक्षा सचिव, वित्त सचिव, मुख्य सतर्कता अधिकारी तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को शिकायतें भेजकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।


    डॉ. सिंगला ने बताया कि पंजाब सरकार की 1979 की सरकारी अनुदान नीति, जिसे चंडीगढ़ प्रशासन ने भी अपनाया है, के अनुसार यदि कोई सहायता-प्राप्त कॉलेज विश्वविद्यालय, यूजीसी या सरकारी मानदंडों का पालन नहीं करता, तो उच्च शिक्षा निदेशक को संबंधित संस्थान का सरकारी अनुदान रोकने, निलंबित करने, घटाने या वापस लेने का अधिकार है।


    यह मामला तब उजागर हुआ जब संबंधित व्यक्ति ने यूजीसी की करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के अंतर्गत पदोन्नति के लिए आवेदन किया। 16 अगस्त 2024 को पंजाब विश्वविद्यालय की स्क्रीनिंग कमेटी ने जांच के दौरान उनकी योग्यता पर प्रश्न उठाए। इसके बाद 17 जनवरी 2025 को डीन, कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल (DCDC), पंजाब विश्वविद्यालय ने यूजीसी से यह स्पष्टता मांगी कि प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाला व्यक्ति क्या इतिहास विषय पढ़ा सकता है। इस पर 25 सितंबर 2025 को यूजीसी ने स्पष्ट किया कि इतिहास विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए इतिहास (UGC Subject Code-6) में स्नातकोत्तर होना अनिवार्य है, जबकि पुरातत्व (UGC Subject Code-67) अलग विषय है।


    इसके बाद 24 नवंबर 2025 को पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की संयुक्त प्रशासनिक एवं अकादमिक समिति ने यह निष्कर्ष दिया कि संबंधित शिक्षक यूजीसी मानदंडों के अनुसार इतिहास पढ़ाने के लिए अयोग्य हैं तथा इतिहास विषय में उनकी CAS पदोन्नति अमान्य है।


    इन निष्कर्षों के बावजूद बताया गया है कि यह मामला पिछले दो महीनों से पंजाब विश्वविद्यालय के कॉलेज ब्रांच और कुलपति कार्यालय में लंबित है, जिससे यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि दोषियों को बचाने के लिए किसी प्रकार का दबाव काम कर रहा है।


    यूजीसी और पंजाब विश्वविद्यालय के चांसलर को भेजी गई शिकायतों में डॉ. राजेन्द्र सिंगला ने यह भी सवाल उठाया है कि एक अयोग्य अभ्यर्थी चयन और जांच समितियों से कैसे पार हो गया और उसे तत्कालीन कुलपति से नियुक्ति की स्वीकृति कैसे मिल गई, जिससे योग्य और मेधावी उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित हुए।


    डॉ. सिंगला ने मांग की है कि यूटी चंडीगढ़ के निजी-सहायता प्राप्त कॉलेजों, विशेषकर डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10, में कार्यरत सभी असिस्टेंट प्रोफेसरों की योग्यता की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यदि ऐसी अन्य अनियमित नियुक्तियां हुई हैं तो उन्हें भी सामने लाया जा सके।

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