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प्रदेश सरकार द्वारा मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक के अस्थाई आदेश से जनता अचंभित।
कुनिहार से नेशन नियुज के लिए हरजिन्दर ठाकुर की रिपोर्ट :-
आज दिनांक 30 मार्च 2026 को पुलिस पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन जिला सोलन के संयोजक एवं वरिष्ठ मुख्य सलाहकार धनीराम तंनवर एवं समस्त कार्यकारिणी प्रधान श्यामलाल ठाकुर कार्यकारी अध्यक्ष नेकीराम ,महासचिव सतपाल शर्मा,संत राम चंदेल वरिष्ठ उप प्रधान पतराम कैशियर, पुष्पा सूद कानूनी सलाहकार दीप राम ठाकुर नागेंद्र ठाकुर लेखराम काईथ रतिराम शर्मा प्रेम कंवर निर्मल ठाकुर जसवीर सिंह श्यामलाल भाटिया चमन लाल वेद ठाकुर धर्म सिंह ठाकुर बीना देवी इत्यादि ने अपने संयुक्त बयान में कहा है कि संगठन के बहुत से सीनियर मेंबर जिन्होंने पुलिस विभाग से अपनी 38, 40 साल का कार्यकाल भिन्न-भिन्न पदों पर पूरा करके रिटायर हुए हैं मगर आज तक ऐसा अपने कार्यकाल के दौरान नहीं देखा गया था कि किसी भी प्रदेश में एक मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक जो करीब 1 साल से कार्यरत है प्रदेश सरकार के सबसे ऊंचे पदों पर विराजमान है जिनके द्वारा प्रशासन व कानूनी व्यवस्था प्रदेश में कायम की जाती है उनके नियुक्ति के आदेश
अस्थाई तौर पर किए गए हो जबकि यह दोनों पद प्रदेश में अहम माने जाते हैं जिनके आज तक सालों से स्थाई तैनाती के आदेश सरकार द्वारा जारी नहीं किए गए जो बड़े अफसोस की बात है कि यह नया ही फार्मूला ईजाद किया गया है। जब इतने बड़े अधिकारियों के आदेश भी स्थाई नहीं किए गए हो तो वह अपने कार्यों को क्या अंजाम देंगे जिनके मन में पहले ही यह बात बैठी हुई होगी कि वह तो पहले ही अस्थाई तौर पर नियुक्त है तो यह अधिकारी अपने तौर पर स्वतंत्रता से कोई भी कड़ा फैसला जो जनहित में हो नहीं ले सकते जबकि मुख्य सचिव का पूरा कंट्रोल प्रशासन पर प्रदेश में होता है वह पुलिस महानिदेशक पूरे प्रदेश के पुलिस मुखिया होते हैं जिन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी जिम्मेवारी होती है मगर उन पर यह अंकुश जो अस्थाई तौर की नियुक्ति का जो लगाया गया है यह समझ से परे है क्योंकि प्रदेश के यह दोनों बड़े अधिकारीयों के मन में हर समय यही सोच रहेगी कि वह तो अस्थाई तौर पर नियुक्त है पता नहीं कब सरकार उन्हें इस पद से हटा दें जिस कारण से यह इंडिपेंडेंडट व निष्पक्ष होकर सरकारी कार्य या कोई कड़ा फैसला लेने में समर्थ नहीं रहेंगे जो इनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
संगठन सरकार से आग्रह करती है कि इन दोनों पदों पर स्थाई नियुक्ति दी जाए ताकि किसी भी पेंशनर कर्मचारी या जनता में शसयं न बना रहे ताकि यह दोनों अधिकारी स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके वह किसी भी प्रकार का फैसला या निर्णय जो जनहित में हो वह ले सके।


