ये भी पढ़ें
सोने में बड़ी गिरावट के बाद अब क्या होगा? Goldman Sachs की भविष्यवाणी ने बाजार को चौंकाया
नई दिल्ली: सोने की कीमतों में हालिया तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड पर दबाव देखने को मिला। 26 अगस्त को स्पॉट गोल्ड करीब 1.3% गिरकर 4,595.93 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था।
लेकिन इस गिरावट के बावजूद Goldman Sachs ने सोने को लेकर अपना सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। बैंक का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना करीब 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकता है। यानी मौजूदा स्तरों से भी आगे बढ़ने की गुंजाइश देखी जा रही है।
गिरावट क्यों आई?
सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा असर अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों का पड़ता है। हालिया अमेरिकी महंगाई आंकड़ों के बाद बाजार में यह आशंका बढ़ी कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें ऊंचा रख सकता है या आगे बढ़ा सकता है।
जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड को समर्थन मिलता है। ऐसे माहौल में सोने जैसे बिना ब्याज देने वाले एसेट की आकर्षण क्षमता कुछ कम हो सकती है। यही वजह है कि मजबूत डॉलर और बढ़ती यील्ड के बीच सोने में दबाव देखा गया।
Goldman Sachs को अभी भी तेजी क्यों दिख रही है?
Goldman Sachs के मुताबिक सोने की सबसे बड़ी ताकत दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। बैंक का अनुमान है कि 2026 में केंद्रीय बैंक औसतन करीब 50 टन सोना प्रति माह खरीद सकते हैं, जबकि 2022 से पहले यह औसत लगभग 17 टन था। जून 2026 में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का अनुमान लगभग 100 टन प्रति माह तक पहुंच गया था।
इसके अलावा, केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक वित्तीय जोखिम भी सोने की सुरक्षित निवेश वाली छवि को मजबूत कर रहे हैं।
क्या 5,000 डॉलर तक पहुंच सकता है सोना?
Goldman Sachs का आधिकारिक बेस केस 2026 के अंत तक 4,900 डॉलर प्रति औंस का है। हालांकि बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि विकल्प बाजार में सोने के कॉल ऑप्शंस की बढ़ती मांग कीमत में तेज उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है। तेजी की स्थिति में यह कीमत को Goldman के अनुमान से भी ऊपर ले जा सकती है।
यानी बाजार के सामने तस्वीर कुछ ऐसी है—छोटी अवधि में दबाव और उतार-चढ़ाव, लेकिन मध्यम अवधि में तेजी की संभावना।
भारत में क्या असर पड़ेगा?
भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय गोल्ड रेट से तय नहीं होती। डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, घरेलू मांग और स्थानीय प्रीमियम भी कीमत को प्रभावित करते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरने के बावजूद भारत में गिरावट उतनी बड़ी या तुरंत नहीं दिख सकती।
हालिया घरेलू बाजार में भी सोने की कीमत में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। रिपोर्टों के मुताबिक चार दिनों में सोने के दाम में करीब ₹5,000 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई थी।
आगे क्या होगा? — Analysis
आने वाले दिनों में सोने की दिशा मुख्य रूप से चार चीजों पर निर्भर करेगी:
1. अमेरिकी फेड का रुख: अगर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है तो सोने को फायदा मिल सकता है। इसके उलट आक्रामक रुख सोने पर दबाव डाल सकता है।
2. डॉलर की चाल: कमजोर डॉलर आमतौर पर सोने के लिए सकारात्मक माना जाता है, जबकि मजबूत डॉलर कीमतों पर दबाव डाल सकता है।
3. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: अगर केंद्रीय बैंक लगातार बड़े पैमाने पर सोना खरीदते रहे तो कीमतों को मजबूत आधार मिल सकता है।
4. भू-राजनीतिक तनाव: युद्ध, व्यापार तनाव या वित्तीय अनिश्चितता बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
हालिया गिरावट को देखकर यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि सोने की तेजी पूरी तरह खत्म हो गई है। Goldman Sachs का मौजूदा अनुमान इसके उलट संकेत देता है। वहीं, सोने में तेजी के बावजूद दोतरफा volatility यानी तेज गिरावट और तेज उछाल दोनों की संभावना बनी हुई है।
इसलिए निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ एक दिन या एक सप्ताह की गिरावट देखकर फैसला न लें। सोने की कीमतें आगे भी अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, केंद्रीय बैंक खरीद और वैश्विक घटनाक्रम के साथ तेजी से बदल सकती हैं।
निष्कर्ष: सोने में हालिया गिरावट ने बाजार को जरूर चौंकाया है, लेकिन Goldman Sachs की $4,900 प्रति औंस की वर्षांत भविष्यवाणी बताती है कि बैंक अभी भी लंबी तस्वीर में सोने को लेकर बुलिश है। हालांकि, इस लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता सीधा नहीं होगा और बीच में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
*यह विश्लेषण समाचार और बाजार पूर्वानुमानों पर आधारित है, निवेश सलाह नहीं।*


