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64 वर्षों के सफल दाम्पत्य जीवन का प्रेरणादायक सफर
संघर्ष, समर्पण और अटूट प्रेम की मिसाल हैं श्री मनशराम पाठक एवं उनकी धर्मपत्नी
कुनिहार से नेशन न्यूज के लिए हरजिन्दर ठाकुर की रिपोर्ट:-
आज के समय में, जब पारिवारिक और वैवाहिक संबंध अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे दौर में श्री मनशराम पाठक एवं उनकी धर्मपत्नी ने अपने वैवाहिक जीवन के 64 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर समाज के समक्ष प्रेम, विश्वास, त्याग और समर्पण की एक अनुपम मिसाल प्रस्तुत की है।
10 जून 1962 को वैवाहिक बंधन में बंधे इस आदर्श दम्पति ने जीवन के हर सुख-दुःख, संघर्ष और सफलता का सामना कंधे से कंधा मिलाकर किया। परिवार के निर्माण, बच्चों के पालन-पोषण, उनकी शिक्षा, विवाह तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने सदैव पारिवारिक मूल्यों, संस्कारों और सामाजिक मर्यादाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
64 वर्षों की इस लंबी वैवाहिक यात्रा में दोनों ने जीवन के प्रत्येक उतार-चढ़ाव को साथ मिलकर पार किया और आपसी प्रेम, सम्मान, सहयोग तथा धैर्य को अपने दाम्पत्य जीवन की आधारशिला बनाया। यही कारण है कि उनका जीवन आज समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
वर्तमान समय में यह दम्पति एक और कठिन परीक्षा से गुजर रहा है। श्रीमती पाठक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से संघर्ष कर रही हैं। इस चुनौतीपूर्ण दौर में श्री मनशराम पाठक ने अद्भुत साहस, समर्पण और सेवा-भाव का परिचय देते हुए अपनी धर्मपत्नी का हर कदम पर साथ निभाया है। उनके अथक प्रयासों, चिकित्सकों की देखरेख तथा ईश्वर की कृपा से स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे अस्पताल से अपने घर लौट आई हैं।
परिवारजनों, मित्रों, रिश्तेदारों एवं समस्त ग्रामवासियों को विश्वास है कि ईश्वर की असीम कृपा, शुभचिंतकों की दुआओं तथा समाज के आशीर्वाद से शेष स्वास्थ्य चुनौतियाँ भी शीघ्र ही दूर होंगी और श्रीमती पाठक पूर्ण रूप से स्वस्थ होंगी।
इस अवसर पर समस्त कुनिहार वासियों, परिवारजनों, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने श्री मनशराम पाठक एवं उनकी धर्मपत्नी को वैवाहिक वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।
यह दम्पति केवल सफल वैवाहिक जीवन का ही नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में साहस, सेवा, निष्ठा और अटूट प्रेम का भी जीवंत उदाहरण है