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🟡 Gold Price Slips: सोने की फिसलन जारी, बड़े फैसलों से पहले बढ़ा दबाव
सोने की कीमतों में सोमवार, 14 सितंबर को कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.6% गिरकर $4,321 प्रति औंस के आसपास आ गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 1.1% की गिरावट दर्ज हुई। लगातार तीसरे साप्ताहिक नुकसान के बाद अब निवेशकों की नजर इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है।
आखिर सोने पर दबाव क्यों बढ़ रहा है?
सबसे बड़ा कारण अमेरिका में महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता है। अगस्त में अमेरिकी कोर महंगाई उम्मीद से मजबूत रही, जिससे बाजार में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना तेजी से बढ़ी है। फेड की 15-16 सितंबर की बैठक से पहले बाजार अब करीब 87% संभावना एक रेट हाइक की मान रहा है, जो पिछले सप्ताह करीब 67% थी।
दूसरी तरफ, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी सोने के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई को लेकर चिंताओं के बीच तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की तेजी आई है। महंगा तेल महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर सख्त रुख अपना सकते हैं।
📉 ब्याज दर और डॉलर का असर
आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने पर सोने पर दबाव आता है, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता। इसके मुकाबले बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाली परिसंपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो जाती हैं। साथ ही मजबूत डॉलर भी डॉलर में कीमत वाले सोने की मांग पर असर डाल सकता है।
विश्लेषकों की क्या राय है?
KCM Trade के Tim Waterer के अनुसार, ऊर्जा कीमतों में तेजी और बढ़ती दरों की उम्मीद सोने के लिए yield headwind पैदा कर रही है। हालांकि, भू-राजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितता के कारण सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
वहीं UBS की रणनीतिकार Joni Teves का मानना है कि फेड की संभावित सख्ती से सोने में अल्पकालिक दबाव आ सकता है, लेकिन लंबे समय में केंद्रीय बैंकों की खरीद, पोर्टफोलियो diversification और भारत-चीन की मौसमी मांग सोने को समर्थन दे सकती है। उनके मुताबिक साल के अंत तक कीमतों में रिकवरी की गुंजाइश बनी हुई है।
StoneX ने भी फेड के फैसले से पहले सोने पर थोड़ा bearish outlook जताया है और कहा है कि मौजूदा macroeconomic माहौल बुलियन के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारत में क्या असर पड़ेगा?
घरेलू सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय भाव के साथ-साथ डॉलर-रुपया विनिमय दर का भी असर पड़ता है। इसलिए फेड का फैसला, अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की दिशा आने वाले दिनों में भारतीय बाजार के लिए अहम संकेत होंगे।
हालांकि, सोने की लंबी अवधि की कहानी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। World Gold Council के अनुसार अगस्त में सोने में करीब 13% की तेजी आई थी और महीना $4,563 प्रति औंस के स्तर पर समाप्त हुआ था। ETF और futures flows ने उस तेजी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
👉 निष्कर्ष: फिलहाल सोने पर शॉर्ट टर्म दबाव बना रह सकता है। फेड का फैसला और उसके बाद चेयरमैन की टिप्पणी यह तय करने में अहम होगी कि यह गिरावट केवल मुनाफावसूली है या सोने में बड़ी correction की शुरुआत।
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