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मंडी में आमने-सामने होंगे दो सियासी घराने, वीरभद्र-सुखराम की विचारधाराओं के बीच जीत को जंग
हिमाचल की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले पंडित सुखराम के घर में मंडी नगर निगम चुनाव के बहाने सियासी युद्ध होगा। इस युद्ध में हिमाचल की सियासत के दो घराने टकराएंगे। इस युद्ध में आमने सामने इन दोनों परिवारों के बेटे होंगे व अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के आसरे सियासी सिद्धि की जाएगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम तथा पूर्व मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह की चाल से सियासी शतरंज पर शह और मात की चाल चली जाएगी। कांग्रेस ने वीरभद्र सिंह के बेटे एवं मंत्री विक्रमादित्य सिंह को मंडी नगर निगम में कांग्रेस को जीत दिलवाने का दायित्व सौंपा है। वहीं, भाजपा ने मंडी के मोर्चे पर उस सदर विधायक अनिल शर्मा को तैनात किया है, जो अब तक कभी चुनाव हारे ही नहीं हैं। ऐसे में मंडी की सियासी पिच पर इन दो राजनीतिक घरानों में ही कड़ी टक्कर होनी है। सियासत के इस चौसर पर 15-15 मोहरे भाजपा और कांग्रेस तैनात करेगी। ये मोहरे भाजपा के भीतर अनिल शर्मा की पसंद के होंगे और कांग्रेस के प्रत्याशी चयन से लेकर जिताने का जिम्मा विक्रमादित्य का होगा।
सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल के चौथे साल में है और भाजपा वापसी की उम्मीद लगा रही है। ऐसे में मंडी दोनों ही सियासी घरानों के वारिसों की अग्नि परीक्षा लेने जा रही है। कांग्रेस सरकार की एंटी इनकम्बेंसी से निपटना मंत्री विक्रमादित्य के लिए चुनौती होगी और फायदा यह है कि आमतौर पर सरकार की छत्रछाया में होने वाले चुनावों का फायदा सत्ताधारी दल को मिलता है। दूसरी तरफ भाजपा मंडी में पहले से ही मजबूत है

